राजभाषा के संवर्धन हेतु ’12 प्र’ – प्रेरणा, प्रोत्साहन, प्रेम, प्राइज़ अर्थात् पुरस्कार, प्रशिक्षण, प्रयोग, प्रचार, प्रसार, प्रबंधन, प्रमोशन (पदोन्नति), प्रतिबद्धता, प्रयास
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हमारे बारे में

कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड वर्ष 1972 में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के तहत भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली सार्वजनिक उपक्रम के रूप में निगमित किया गया । शुरुआत में ही भारत सरकार के उपक्रम होने के नाते, कोचीन शिपयार्ड राजभाषा के रूप में हिंदी के प्रचार-प्रसार में प्रतिबद्ध है। कंपनी में राजभाषा के प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने केलिए वर्ष 1978 में एक हिंदी कक्ष की परिकल्पना की गई थी।

इन वर्षों में, हिंदी कक्ष की गतिविधियां मात्र सांविधिक आवश्यकता न रहकर तकनीकी रूप से सुसज्जित और अधिक पेशेवर और सर्जनात्मक टीम के रूप में उभरकर सामने आया है।

फिलहाल राजभाषा कार्यान्वयन गतिविधियां एक हिंदी अधिकारी के साथ एक हिंदी अनुवादक और एक हिंदी टंकक द्वारा संचालित है । यह टीम, सहायक महाप्रबंधक को रिपोर्ट करती है जो कक्ष के सभी कार्यों के प्रभारी हैं।

गतिविधियों की निगरानी अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक की अध्यक्षता वाली एक राजभाषा कार्यान्वयन समिति द्वारा की जाती है, जिसमें विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष होते हैं।

कार्यान्वयन की ज़िम्मेदारी अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक पर निर्भर है, जो समय-समय पर इन गतिविधियों की रिपोर्ट भारत सरकार को प्रदान करते हैं ।

प्रशिक्षण

  • डेस्क प्रशिक्षण
  • ऑनलाइन कार्यशाला
  • बोलचाल हिंदी
  • प्रबोध, प्रवीण, प्राज्ञ
  • राजभाषा प्रबंधन कार्यक्रम

योजनाएँ

  • राजभाषा प्रोत्साह्न योजना
  • गृह पत्रिका
  • नराकास प्रतियोगिताएं
  • हिंदी पाठ्यक्रम
  • हिंदी पखवाड़ा

समारोह

  • हिंदी दिवस
  • हिंदी पखवाड़ा / राजभाषा माह
  • विशेष कार्यक्रम

हिंदी पुस्तकालय

  • पुस्तक सूची

मानद राजभाषा पुरस्कार

  • गृह मंत्रालय – कीर्ति पुरस्कार
  • पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
  • नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति

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